स्वास्थ्य

रोगी का विश्वास बनाए रखना चिकित्सक की पहली जिम्मेदारी: उपराष्ट्रपति

एम्स ऋषिकेश के छठवें दीक्षांत समारोह में 386 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां

ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में बृहस्पतिवार में छठवें दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एम्स ऋषिकेश के छठवें दीक्षांत समारोह में मेडिकल के 11 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया। साथ ही दीक्षांत समारोह में संस्थान के 386 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान गई। इस दौरान उन्होंने चिकित्सक बनकर उपाधि प्राप्त करने वाले मेडिकल के विद्यार्थियों से कहा कि रोगी का विश्वास बनाए रखना एक चिकित्सक की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें डॉक्टर बनाने में न केवल शिक्षकों की भूमिका है बल्कि माता-पिता का भी विशेष मार्गदर्शन है। इन दोनों को जीवन में कभी नहीं भूलें।

बृहस्पतिवार को एम्स,ऋषिकेश में आयोजित 6वें दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, विशिष्ठ अतिथि उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक) अनुप्रिया पटेल, एम्स के अध्यक्ष प्रोफेसर राज बहादुर, संस्थान की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह व डीन एकेडमिक प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय ने संयुक्तरूप से दीप प्रज्ज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोविड काल में चिकित्सकों ने जिस तरह से लोगों के प्राण बचाने में अपना धर्म निभाया, वह बहुत ही सराहनीय है।

उन्होंने कि सरकार की प्रतिबद्धता के चलते चिकित्सा वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई वैक्सीन न सिर्फ अपने देशवासियों को लगाई गई व उनका जीवन कोविड से सुरक्षित किया गया, भारत देश ने दुनिया के सौ से अधिक देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई है। कहा कि इससे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि आज एम्स, ऋषिकेश इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है, कि कैसे आधुनिक संस्थान नैदानिक उत्कृष्टता, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, संस्कृति, तकनीकी नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता का एक साथ समन्वय कर सकते हैं।

उन्होंने ने कहा कि पिछले एक दशक में, देशभर में स्थित एम्स, AIIMS संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को सुदृढ़ किया है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां इनकी कमी बनी हुई थी और लोग बेहतरीन चिकित्सा से वंचित थे। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां की भौगोलिक परिस्थितियां स्वयं ही बाधाएं उत्पन्न करती हैं, AIIMS ऋषिकेश ने एक पारंपरिक अस्पताल की भूमिका से कहीं अधिक व्यापक भूमिका निभाई है।
चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों तक तथा उत्तराखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आपातकालीन दवाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन के उपयोग का प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है।

राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि रोगी का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक चिकित्सक का कर्तव्य है। दीक्षांत समारोह चिकित्सा स्नातकों के लिए नई दिशा, दायित्वबोध व नए उद्देश्यों की शुरुआत है। कहा कि ऋषिकेश एम्स मरीजों को उच्चस्तरीय गुणवत्ता के साथ चिकित्सा सेवा दे रहा है। उन्होंने एम्स को राज्य में चिकित्सा क्षेत्र खासकर आपात मरीजों के लिए जीवनदान देने वाला संस्थान बताया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना युवाओं के सतत प्रयासों व राष्ट्रहित के संकल्प के साथ कार्य करने से ही साकार होगा। उन्होंने कहाकि रोगी का विश्वास ही चिकित्सक की सबसे बड़ी पूंजी है उसे इसे जीवन पर्यंत बनाए रखनी चाहिए।

समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिकित्सकीय पेशे को मानवता की सेवा बताया। चिकित्सक अपने ज्ञान व कौशल से आम जन को स्वास्थ्य की संजीवनी प्रदान करते हैं। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के परिप्रेक्ष्य में एम्स ऋषिकेश को स्वास्थ्य के मंदिर का प्रतीक बताया। उन्होंने नवोदित चिकित्सकों से जीवन में जब कभी समय मिले तो सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की चिकित्सा सेवा के लिए आने का आह्वान किया, कहा इससे उन्हें भी देवभूमि की सेवा का पुण्य प्राप्त होगा। उन्होंने आपात स्थितियों में एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा, ड्रोन सेवा को राज्य के जनस्वास्थ्य के लिए बेहतर प्रयास बताया है। कहा कि एम्स के किच्छा सेटेलाइट सेंटर के निर्माण से राज्य में चिकित्सा सेवाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी और लोगों को गंभीरतम रोगों के उपचार में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि यह दिन चिकित्सा क्षेत्र में उपाधियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए जीवन का नया अध्याय का आगाज है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक का जीवन समाज को समर्पित व लोगों के दुखों के शमन के लिए होता है। उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रोफेशन सिर्फ एक कॅरियर नहीं मानव सेवा का सशक्त माध्यम है। कहा कि मरीज के लिए चिकित्सक ईश्वर का अवतार होता है। लिहाजा उसकी उम्मीदों व भरोसे पर खरा उतरना प्रत्येक चिकित्सक की संकल्पबदध वाद्यता है। लिहाजा चिकित्सक को मरीज का यह विश्वास सदैव कायम रखने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए।

डॉ. मनु मल्होत्रा एवं डॉ. जयंती पंत के संयुक्त संचालन में आयोजित समारोह में संस्थान के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वार्ष्णेय ने भी विचार रखे। समारोह में हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, रास सांसद नरेश बंसल समेत संस्थान के फैकल्टी सदस्य व अन्य अतिथिगण मौजूद रहे।

386 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां
दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में एमबीबीएस के 100, बीएससी ऑनर्स नर्सिंग के 89, बीएससी एलाईड हेल्थ सांईस के 1, एमडी/एमएस/एमडीएस 2022 बैच के 29, इसी पाठ्यक्रम में 2023 बैच के 67, एमएससी नर्सिंग के 19, एमएससी मेडिकल के 2, मास्टर आॅफ पब्लिक हेल्थ के 2, डीएम/एमसीएच 2022 बैच के 36, इसी पाठ्यक्रम में 2023 बैच के 30 और पीएचडी के कुल 11 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गयीं।

1- स्वर्ण पदक
डॉ. देवांग अग्रवाल 2019 बैच एमबीबीएस- 7 पदक डा. मेहुल अग्रवाल 2022 बैच डीएम/एमसीएच
डॉ. मयंक कपूर 2023 बैच डीएम/एमसीएच
डॉ. श्रीजिठ जे 2022 बैच एमडी/एमएस
डॉ. बालाचंद्र राॅठू 2023 बैच एमडी/एमएस
डॉ. रश्मीत कौर 2019 बैच एमबीबीएस
आरती राणा 2021 बैच, बीएससी नर्सिंग

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