उत्तराखंड

सेवा भारती के सेवा कार्यों से बदल रहा समाज का दृष्टिकोण : डॉ. शैलेन्द्र

भारतीय समाज में सेवा और सामूहिक चेतना हमारी पहचान : प्रो. सुरेखा डंगवाल

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि समाज के उपेक्षित, वंचित और अभावग्रस्त वर्गों के उत्थान के बिना विकसित भारत की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति मुख्यधारा से नहीं जुड़ता, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सेवा भारती इसी उद्देश्य को लेकर वर्षों से समाज के बीच सेवा कार्यों का विस्तार कर रही है।

रविवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडी सभागार में सेवा भारती देहरादून महानगर के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए डॉ. शैलेन्द्र ने यह बातें कही। उत्तरी महानगर अध्यक्ष सतीश डंगवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

प्रांत प्रचारक डॉ शैलेंद्र ने कहा कि सेवा भारती के विभिन्न सेवा प्रकल्पों और संस्मरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और स्वावलंबन के माध्यम से सेवा भारती जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य कर रहा है।उन्होंने कहा कि संगठन अब विवाह संस्कार जैसे सामाजिक नवाचारों पर भी कार्य कर रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि जब समाज के सामने सेवा कार्यों के वास्तविक परिणाम दिखाई देते हैं तो लोग स्वयं आगे आकर सहयोग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं और बहनें सेवा भारती सहित समाज के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं। सेवा कार्यों में उनकी सहभागिता समाज को नई दिशा देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सेवा और संवेदना के कार्यों से लोगों की सोच बदलती है और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।

दून विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी विशेषता सामूहिक चेतना और सेवा भाव है। हमारी संस्कृति केवल अपने तक सीमित नहीं रही, बल्कि पड़ोसी देशों के सहयोग की भावना भी भारतीय परंपरा का हिस्सा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में व्यक्तिगत सोच अधिक देखने को मिलती है, जबकि भारतीय समाज परिवार और सामाजिक रिश्तों को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ते असंतोष को समझने और परिवार व समाज के रिश्तों को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज युवाओं और बच्चों को केवल पैकेज आधारित तनाव में उलझे है। उन्होंने उनको इस सोच से बाहर निकलकर सेवा और संस्कार आधारित जीवन अपनाने का संदेश दिया।

कार्यक्रम में सेवा भारती केंद्र की शिक्षिकाओं ने प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। इस दौरान बताया गया कि सेवा भारती की ओर से वर्तमान में 84 बस्तियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन एवं सामाजिक समरसता के उद्देश्य को लेकर कुल 109 सेवा केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता तथा समाज के वंचित वर्गों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

इस अवसर पर बाल संस्कार केंद्र के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों ने देशभक्ति गीत, समूह नृत्य और संस्कारपरक प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्कार केंद्र समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

मंच संचालन सुनीता पाण्डेय और ऋतु सिंघल ने संयुक्त रूप किया। इस मौके पर विभाग प्रचारक धनंजय, सेवा भारती के प्रांत मंत्री विमल, सेवा प्रमुख उतरी सुधीर, दक्षिण विजय, आनंद प्रकाश सहित बड़ी संख्या में अन्य लोग उपस्थित रहे।

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