उत्तराखंड

अध्यात्म के बिना जीवन संभव नहीं और आयुर्वेद के बिना शरीर कुछ नहींः निशंक

ऋषिकेश। ऑरावैली आश्रम ऋषिद्वार में सिन्थेसिस ऑफ साइन्स एण्ड स्पिरिचुअलिटी फाॅर द हाइएस्ट वेल्फेयर ऑफ सोसाइटी विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व शिक्षा मंत्री और हरिद्वार से संासद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, डॉ. इंद्रानी सान्याल, ऑरावैली आश्रम के संस्थापक मौजूद रहे।
डॉ. निशंक ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि देवभूमि आने पर उसका देवत्व जागृत हो जाता है। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के समय व्यक्ति को दो बातें समझ आई। पहली अध्यात्म के बिना जीवन संभव नहीं और आयुर्वेद के बिना शरीर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां से विज्ञान की यात्रा खत्म होती है, वहां से आध्यात्मिक यात्रा शुरू होती है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत संस्कृति, प्रकृति, अध्यात्म, विज्ञान, आचार और व्यवहार से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिस दिन पर्यावरण का समाधान हो जाएगा, उसी दिन सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
डॉ. इंद्राणी सान्याल ने श्री अरबिंदो के जीवन का सार बताते हुए उनकी जीवन शैली की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि श्री अरबिंदो एक महान योगी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने श्री अरबिंदो द्वारा रचित हार्मनी ऑफ वर्चू के बारे में भी बताया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में फ्रांस से पद्मश्री सम्मानित किरण व्यास, यूकोस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह एवं चेयरमैन अरबिंदो सोसाइटी के प्रोफेसर शरद जोशी, सरदार पटेल यूनिवर्सिटी से डॉ. बीएस वैष्णव एवम डॉ. विभा वैष्णव ने अध्यात्म और विज्ञान से जुड़ी विभिन्न विचार साझा किए।
धन्यवाद ज्ञापन देव संस्कृति विश्वविद्यालय के सहायक प्रध्यापक डॉ. दीपक कुमार ने किया, एवम यूकोस्ट के डॉ. मनमोहन रावत ने विशिष्ट अथितियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विभिन्न विशेषज्ञ ने भी विज्ञान एवं अध्यात्म विषय पर अपने व्याखान प्रस्तुत किए। इसमें सैकड़ों प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। 26 प्रस्तुतिकरण एवम 10 अतिथि व्याखान हुए। इसमें एम्स ऋषिकेश एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

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