शिक्षा

शिक्षा विभाग में पदोन्नत हुये चार अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

रिश्वत प्रकरण में डोईवाला के प्रभारी बीईओ निलंबित

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग में संयुक्त निदेशक से अपर निदेशक के पद पर पदोन्नत चार अधिकारियों को नवीन तैनाती दे दी गई है। इस संबंध में शासन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को विभगाीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने स्वीकृति दे दी है।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत के निर्देशों के क्रम में विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों की डीपीसी के माध्यम से पदोन्न्ति की प्रक्रिया पूरी की गई थी। जिसमें संयुक्त निदेशक पद पर कार्यरत मेहरबान सिंह बिष्ट, कुंवर सिंह रावत, पदमेन्द्र सकलानी एवं परमेन्द्र कुमार को अपर निदेशक पद पर पदोन्नत किया गया था। पदोन्नति के उपरांत शासन द्वारा अपर शिक्षा निदेशक के रिक्त पदों के सापेक्ष नवीन तैनाती प्रस्ताव विभागीय मंत्री डाॅ. रावत के समक्ष रखा गया, जिसे डा. रावत ने स्वीकृति दे दी है। जिसके तहत मेहरबान सिंह बिष्ट को अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा कुमाऊं मण्डल, कुंवर सिंह रावत को अपर निदेशक महानिदेशालय के साथ ही अपर निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा का अतिरिक्त दायित्व दिया गया है। इसके अलावा पदमेन्द्र सकलानी को अपर निदेशक एससीईआरटी तथा परमेन्द्र कुमार को अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मण्डल की जिम्मेदारी सौंपी है। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने विश्वास जताया कि इन अधिकारियों के अनुभव और दक्षता से विभागीय कार्यों में और अधिक गति आएगी तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

रिश्वत प्रकरण में डोईवाला के प्रभारी बीईओ निलंबित

देहरादून। रिश्वत लेने के आरोप में डोईवाला के प्रभारी खण्ड शिक्षा अधिकारी धनबीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुये तत्काल प्रभाव से प्रभारी बीईओ के निलम्बन प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है, शीघ्र ही शासन स्तर से निलम्बन आदेश जारी कर दिये जायेंगे। डाॅ. रावत ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार व अनुशासनहीनता कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

हाल ही में विजिलेंस टीम द्वारा डोईवाला में तैनात प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धनबीर सिंह को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारी को उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये कि विभाग में ऐसे प्रकरणों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समय-समय पर निरीक्षण करें साथ ही छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं आमजन से फीडबैक लेकर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाएं। उन्होंने कहा कि विभाग के अंतर्गत किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधियों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी

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