उत्तराखंड

पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी का निधन, उत्तराखंड में शोक की लहर

कल की जाएगी अंत्येष्टि, तीन दिन का राजकीय अवकाश घोषित

  • राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने खंडूड़ी के निधन पर जताया शोक

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने राजधानी देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने खंडूड़ी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक
पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी के निधन पर उत्तराखंड शासन ने 19 मई से 21 मई तक तीन दिन का राजकीय शोक’ घोषित किया है। इस दौरान प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों एवं शासकीय संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा तथा किसी प्रकार के शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी की अंत्येष्टि 20 मई को राजकीय सम्मान के साथ ही जाएगी। अंत्येष्टि के दिन सभी सरकारी कार्यालय और स्कूल-काॅलेज बंद रहेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री को अर्पित की श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके वसंत विहार स्थितघर पर लाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी छत्तीसगढ़ प्रवास से देहरादून पहुंचने के तुरंत बाद खंडूड़ी के निवास पहुंचे और दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी का जीवन अनुशासन, राष्ट्रसेवा, ईमानदारी और जनकल्याण के मूल्यों का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के पश्चात उन्होंने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भी उच्च आदर्श स्थापित किए।

मुख्यमंत्री ने खंडूड़ी की पुत्री विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण सहित अन्य परिजनों से भेंट कर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उन्हें इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अपूरणीय क्षति केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखण्ड और देश की है।

पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, हरीश रावत व डा. रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा, खजान दास, प्रदीप बत्रा, भरत सिंह चौधरी, विधायक प्रीतम सिंह, विनोद चमोली व बृजभूषण गैरोला, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी खंडूड़ी के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

राजनीति सफर
मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद खंडूड़ी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। खंडूड़ी पहली बार 1991 में गढ़वाल से लोकसभा के लिए चुने गए थे। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में वे 2000 से 2003 तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। 2003 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया। उन्होंने विभिन्न संसदीय समितियों में अपनी सेवाएं दी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में रहते हुए उन्होंने भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना तथा उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारा परियोजना को मूर्त रूप दिया।

खंडूड़ी 2007 में पहली बार और 2011 में दोबारा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। खंडूड़ी को उत्तराखंड की राजनीति में एक सख्त, अनुशासित और ईमानदार नेता के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा। खंडूड़ी के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान एक नवंबर 2011 को पारित उत्तराखंड लोकायुक्त विधेयक रहा। यह कानून उस समय देश के सबसे सशक्त और व्यापक लोकायुक्त कानूनों में गिना गया। इसमें मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद और विधायकों को भी जांच के दायरे में लाने का प्रविधान था।

 

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