उत्तराखंड

त्रिभुवन चौहान, अनिल बैंजवाल और राजेश बैंजवाल समेत 52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज

जिलाधिकारी ने कहा- धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता और हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

अगस्त्यमुनि। क्रीड़ा भवन के मुख्य द्वार को तोड़ने और नेशनल हाईवे-107 जाम करने के आरोप में पुलिस ने त्रिभुवन चौहान, अनिल बैंजवाल व राजेश बैंजवाल सहित 12 लोगों के खिलाफ नामजद और 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 127, धारा 191(2), धारा 61, धारा 285 के साथ लोक संपत्ति को नुकसानी का निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया है। जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा अथवा अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

उल्लेखनीय है कि अगस्त्यमुनि में मकर संक्रांति के दिन अगस्त्य ऋषि मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मुनि महाराज की चल विग्रह डोली लगभग 15 साल बाद दिवारा यात्रा के लिए निकाली गई थी। इस ऐतिहासिक अवसर को देखने के लिए 365 गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अगस्त्यमुनि पहुंचे हुए थे। जैसे ही डोली मंदिर से आगे बढ़ी, पूरा इलाका “मुनि महाराज की जय” के जयकारों से गूंज उठा।

डोली जब अगस्त्यमुनि मैदान के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंची तो मैदान के गेट की ऊंचाई और चैड़ाई कम होने के कारण डोली अंदर प्रवेश नहीं कर सकी। डोली के मैदान में पहुंचने का इंतजार कर रहे सैकड़ों लोग अचानक यहां रुक गए और देखते ही देखते केदारनाथ हाईवे पर भारी भीड़ जुट गई।

इसी बीच कुछ कुछ लोगों ने गेट को अवरोध मानते हुए खुद ही गेट को तोड़ना शुरू कर दिया। इससे मौके पर तनाव बढ़ गया और माहौल अव्यवस्थित हो गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भीड़ को शांत करने में मशक्कत करनी पड़ी, जबकि डोली काफी समय तक वहीं मुख्य द्वार पर खड़ी रही।

जिलाधिकारी ने कहा कि अगस्त्यमुनि नगर में महर्षि अगस्त्य मुनि महाराज की ऐतिहासिक एवं पारंपरिक देवरा यात्रा के सफल, शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूर्व से ही समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई थीं। प्रशासन द्वारा मुनि महाराज की डोली को महर्षि अगस्त्य मंदिर से अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल तक विधिवत एवं परंपरागत मार्ग से प्रवेश कराने के लिए समय रहते सभी प्रबंध पूर्ण कर लिए गए थे। इसके बावजूद कुछ तत्वों द्वारा जबरन डोली को क्रीड़ा भवन अगस्त्यमुनि के मुख्य द्वार से ले जाने का दबाव बनाया गया तथा इसी उद्देश्य से क्रीड़ा भवन के मुख्य गेट को तोड़ा गया।

जिलाधिकारी ने इसे अनुशासनहीनता एवं कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास बताते हुए पुलिस अधिकारियों को इसमें शामिल कुछ ‘रिपेटिटिव ऑफेंडर्स’ के खिलाफ गुंडा एक्ट सहित अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार की अराजकता, हिंसा अथवा अव्यवस्था को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनपद के शांतिपूर्ण माहौल को खराब करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

इनके विरुद्ध दर्ज हुआ मुकदमा

(1) त्रिभुवन चैहान पुत्र कुलदीप सिह निवासी देवर थाना गुप्तकाशी जनपद रूद्रप्रयाग
(2) अनिल बैंजवाल पुत्र चक्रधर बैंजवाल निवासी नाकोट अगस्त्यमुनि
(3) राजेश बैंजवाल पुत्र भगवती प्रसाद निवासी उपरोक्त
(4) योगेश बैंजवाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद बैंजवाल निवासी उपरोक्त
(5) शेखप नौटियाल पुत्र अनुसुइया प्रसाद नौटियाल निवासी सिल्ला बामण गांव अगस्त्यमुनि
(6) भानु चमोला पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्त्यमुनि
(7) मिथुन सब्जी वाला निवासी अगस्त्यमुनि
(8) मकर लाल पुत्र अज्ञात निवसी फलई अगस्त्यमुनि
(9) हैप्पी असवाल पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्त्यमुनि
(10) विपिन रावत पुत्र अज्ञात निवासी जखन्याल गांव अगस्त्यमुनि
(11) केशव अग्रवाल पुत्र अज्ञात निवासी जखन्याल गांव अगस्त्यमुनि
(12) प्रियाशु मोहन पुत्र अज्ञात निवासी तिलवाडा अगस्तयमुनि एंव 40 अन्य लोग

जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कराईं सभी आवश्यक तैयारियां
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि प्रशासन द्वारा महर्षि अगस्त्य मंदिर से अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल तक पारंपरिक देवरा मार्ग पर विशेष ध्यान दिया गया था। यात्रा मार्ग पर साफ-सफाई, चूना डालकर मार्ग को समतल एवं सुचारु बनाना, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आवश्यक प्रबंध, यातायात नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुनिश्चित किया गया था, ताकि देवरा यात्रा श्रद्धा, शांति एवं परंपरागत मर्यादा के अनुरूप सम्पन्न हो सके।

जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि वे धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखें। प्रशासन का सहयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों या अराजक गतिविधियों से दूर रहें। प्रशासन जनपद में शांति, कानून व्यवस्था एवं धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

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