
देहरादून। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। साथ ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने भी आम जनता, अधिकारियों और कर्मचारियों से अनुरोध किया है कि सब मिलकर ईंधन की बचत करने का प्रयास करें। आज परिवहन विभाग ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए जारी की एडवाजरी की है।

उप परिवहन आयुक्त, उत्तराखण्ड शैलेश कुमार तिवारी की ओर से जारी की गई एडवाजरी में दस महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
- स्मूथ ड्राइविंग तकनीक का इस्तेमाल करें- बार बार स्पीड बढ़ाने और अचानक ब्रेक लगाने से बचें। एक्सीलेटर को धीरे-धीरे दबायें। अचानक गति बढ़ाने और अचानक ब्रेक लगाने से ईंधन की बर्बादी होती है। कई कार ड्राइवर को जल्दी-जल्दी गियर बदलने और क्लच का काफी इस्तेमाल करने की आदत होती है जल्दी-जल्दी गियर बदलने से कार के क्लच पर काफी प्रेशर पड़ता है। सड़क और स्पीड के आधार पर उचित गियर का प्रयोग करें। बहुत लो या बहुत हाई गियर में गाड़ी चलाने से फ्यूल ज्यादा खर्च होता है। कम गति में हाई गियर या ज्यादा गति में लो गियर इंजन पर दबाव डालता है।
- ट्रैफिक सिग्नल पर इंजन बंद करें- ट्रैफिक सिग्नल पर या 30 सैकंड से ज्यादा रूकने पर इंजन बंद करें।
- सही टायर प्रेशर रखें- टायरों में हवा का दबाव हमेशा सही रखें। कम हवा वाले टायरों से ईंधन की खपत 5-10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। अगर गाड़ी के टायर में हवा कम है तो स्पीड और बैलेंस बनाए रखने के लिए इंजन को ज्यादा जोर लगाना पड़ता है। कम हवा वाले टायरों का सड़क पर घर्षण प्रतिरोध भी अधिक होता है। नियमित रूप से टायर प्रेशर चैक करें।
- वाहन में अतिरिक्त भार न डालें- वाहन में अनावश्यक भारी सामान न रखें, इससे इंजन पर जोर पड़ता है प्रत्येक 50 kg अतिरिक्त वजन से वाहन के ईंधन खपत में 2% तक वृद्धि हो सकती है। जितना हो सके बूट स्पेस खाली रखें। ज्यादा वजन का मतलब है ज्यादा ईंधन का प्रयोग।
- AC का सही प्रयोग- गाड़ी चलाते समय ए०सी० चालू रखने से ईंधन की खपत काफी बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ए०सी० कार में आने वाली हवा को ठंडा करने के लिए इंजन की शक्ति का उपयोग करता है जिससे पहियों के लिए उपलब्ध शक्ति कम हो जाती है। ए०सी० चालू होने पर ईंधन की खपत कम करने के लिए खिड़कियां बन्द रखने की कोशिश करें और पंखे की गति को यथा संभव कम रखें। अनावश्यक रूप से कार में ए०सी० का प्रयोग न करें।
- ऑटोमेटिक वाहनों में कूज कंट्रोल का उपयोग करें- एक्सपर्ट के अनुसार उपयुक्त परिस्थितियों में कूज कंट्रोल का उपयोग करने से माइलेज में 10 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है। हाइवे व एक्सप्रेस-वे में इसका प्रयोग ईंधन बचत में अधिक कारगर होता है। हालांकि खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में यात्रा के दौरान कूज कंट्रोल के उपयोग से बचना चाहिए।
- यात्रा की प्लानिंग- Rush Hours में यात्रा करने से बचें। इस अवधि में मार्ग पर ट्रेफिक अधिक होता है जिससे चालक के बार-बार क्लच ब्रेक प्रयोग से ईंधन की खपत अधिक होती है। जहां तक संभव हो जाम वाली सड़कों से बचें और छोटे रास्तों का इस्तेमाल करें। सटीक जानकारी हेतु गूगल मैप का प्रयोग किया जा सकता है।
- वाहन की नियमित सर्विसिंग करायें7 एयर फिल्टर, इंजन ऑयल और स्पार्क प्लस को नियमित रूप से बदलें, गंदा फिल्टर इंजन के प्रदर्शन को कम करता है। गाड़ी की नियमित सर्विसिंग कराने से इंजन बेहतर तरीके से काम करता है।
- कार पूलिंग करें- जब एक ही रास्ते, दिशा या स्थान में जाने वाले कई लोग अलग अलग कारों में न जाकर एक ही निजी कार में जाकर सफर करते हैं तो इसे कार पूलिंग कहा जाता है। इससे यात्रा पर आने वाले खर्च का बंटवारा हो जाता है, ईंधन की बचत होती है, ट्रैफिक कम होता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। उदाहरणस्वरूप चार लोग एक कार में कार पूल करें तो स्वतः ही तीन कार कम इस्तेमाल में आएंगी। कुछ लोग पैसे देने की बजाय बारी बारी से हर दिन एक दूसरे की कार का प्रयोग करके यात्रा करते हैं।
- सार्वजनिक परिवहन यान का इस्तेमाल करें- बस, मेट्रो, ट्रेन, जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग ईंधन की खपत और उत्सर्जन को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर इनका उपयोग करने से प्रति व्यक्ति ईंधन की खपत भी कम हो जाती है। सड़क पर निजी वाहनों की संख्या घटने से ट्रैफिक जाम कम होता है। साथ ही कम दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल का इस्तेमाल करना न सिर्फ ईंधन बचाना है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।




