उत्तराखंड

राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी: CDS अनिल चौहान

गढ़वाल विश्वविद्यालय में 'सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा' पर सीडीएस अनिल चौहान का संबोधन

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान का भव्य स्वागत हुआ। शनिवार को बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनरल चौहान ने यहां ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा पर ऐतिहासिक सम्बोधन दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की भव्य उपस्थिति में शनिवार 21 फरवरी का दिन गढ़वाल विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐतिहासिक दिवस के रूप में दर्ज हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्र गीत वन्दे मातरम् के साथ हुआ। कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अपने स्वागत वक्तव्य में मंचासीन अतिथियों, विधायक, सैन्य अधिकारियों एवं नगर के गणमान्य नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वीर भूमि उत्तराखंड, आज मुख्य अतिथि जनरल अनिल चौहान के आगमन से गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि इस पावन धरती ने देश को अनेक वीर सपूत दिए हैं। जनरल चौहान द्वारा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को प्रदत्त शोधपरक महत्वपूर्ण पुस्तकों के लिए विशेष धन्यवाद देते हुए उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी इससे लाभान्वित होंगे।

कुलपति ने जनरल अनिल चौहान का संक्षिप्त जीवन परिचय प्रस्तुत किया और विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने बताया कि सेना के साथ अग्निवीर प्रशिक्षण कार्यक्रमों हेतु एमओयू हुए हैं तथा विश्वविद्यालय “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने ‘सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर अपने विस्तृत संबोधन में विश्वविद्यालय की स्थापना के 50 वर्षों में अर्जित उपलब्धियों की सराहना करते हुए कुलपति एवं समस्त शिक्षक समुदाय को बधाई दी। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का वास्तविक स्वरूप तथा उत्तराखंड का संभावित योगदान क्या हो सकता है’ विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है, जिसकी शुरुआत विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से होनी चाहिए। साहिर लुधियानवी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक संकल्प पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की दूरदर्शी सामरिक सोच वैदिक साहित्य, चाणक्य नीति और धनुर्वेद जैसी परंपराओं से प्रेरित है, किंतु इतिहास के मुगल और ब्रिटिश कालखंडों में यह दृष्टि कमजोर हुई। आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय तत्व बताते हुए उन्होंने आंतरिक एवं बाहरी खतरों, 1971 के उदाहरण, बदलती युद्ध अवधारणाओं तथा तकनीक-प्रधान संघर्षों का उल्लेख किया।

उन्होंने देश की सीमाओं और परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों को भारत की प्रमुख चुनौतियाँ बताते हुए कहा कि सुदृढ़ सरकार, मजबूत सेना और रणनीतिक तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में उन्होंने उत्तराखंड की सामरिक महत्ता को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, सजग रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में जनरल अनिल चौहान ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। संवाद के दौरान पल्लवी उनियाल ने सेना में महिलाओं की भर्ती और उनकी भूमिका को लेकर प्रश्न किया। इस पर जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है, उसी प्रकार भारतीय सेना के प्रत्येक क्षेत्र में भी महिलाओं को समान अवसर और जिम्मेदारियाँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि योग्यता और प्रतिबद्धता ही चयन का आधार है, लिंग नहीं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं मनीषा सिंह, शुभम, आशीष कुमार आदि ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा और कैरियर से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका जनरल चौहान ने विस्तारपूर्वक एवं संतोषजनक उत्तर दिया।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड के स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने जनरल अनिल चौहान तथा सभी मंचासीन अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को पुस्तक दान की पहल श्रीमती अनुपमा चौहान के विशेष प्रयासों से संभव हुई। डॉ. रावत ने उन्हें उनके पैतृक गांव गवाणा आने का आमंत्रण भी दिया।

अंत में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी. गुसाईं ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा विश्वविद्यालय पुस्तकालय हेतु पुस्तक दान के लिए जनरल चौहान का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर देवप्रयाग विधानसभा के विधायक विनोद कण्डारी, प्रो. महेन्द्र प्रताप सिंह बिष्ट, प्रो. मोहन पंवार, प्रो. मंजुला राणा, प्रो. एचबीएस चौहान, ब्रिगेडियर विनोद नेगी, कर्नल गौरव बत्रा, मुख्य नियंता प्रो दीपक कुमार, प्रो एनएस पंवार, अनीष उज जमान, प्रो. राकेश डोढ़ी, चौरास परिसर के निदेशक प्रो. राजेन्द्र सिंह नेगी, जन संपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा, सहित शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अन्य झलकियां
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को 227 महत्वपूर्ण पुस्तकें दान स्वरूप प्रदान कीं। ये पुस्तकें विभिन्न सामरिक, ऐतिहासिक एवं शोधपरक विषयों से संबंधित हैं, जिनसे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अकादमिक रूप से विशेष लाभ प्राप्त होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पहल को ज्ञान-संपदा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान बताया। इस अवसर पर जनरल चौहान की धर्मपत्नी अनुपमा चौहान भी उपस्थित रहीं।

अपने सम्बोधन में जनरल अनिल चौहान ने कहा कि उनकी धर्मपत्नी अनुपमा चौहान ने सैन्य सोसाइटी (एडब्ल्यूडब्ल्यूए ) के माध्यम से नीति गांव को गोद लिया है, जहाँ वे सामाजिक एवं शैक्षिक विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इसी क्रम में प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट द्वारा संपादित पुस्तक “रणभूमि दर्शन” का विमोचन जनरल अनिल चौहान, डॉ धन सिंह रावत , कुलपति श्रीप्रकाश सिंह तथा अन्य मंचासीन गणमान्यों ने किया। इस पुस्तक में सीमांत गांवों के भ्रमण तथा सैन्य छावनी लैंसडाउन से संबंधित संस्मरणों का संकलन प्रकाशित किया गया है, जो क्षेत्रीय अनुभवों और सैन्य-सांस्कृतिक दृष्टि को समृद्ध रूप में प्रस्तुत करता है।

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