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हरिद्वार में भिक्षा मांग रही कुमाऊं यूनिवर्सिटी की पूर्व उपाध्यक्ष हंसी की मदद को आगे आई सरकार

  • राज्य सरकार ने हंसी के इलाज का पूरा खर्चा उठाने का दिया भरोसा दिया

  • पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हंसी को निजी संस्थान में दिलाने की बात कही

देहरादून। हरिद्वार में भीख मांग कर अपना और बेटे का गुजर-बसर कर कर रहीं कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष हंसी प्रहरी की मदद के लिए सरकार के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीशव रावत और राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा भी आगे आए हैं। राज्य सरकार ने जहां हंसी के इलाज का पूरा खर्चा उठाने का भरोसा दिया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हंसी उन्हें हरिद्वार के एक निजी संस्थान में नौकरी दिलाने की बात कही।

अल्मोड़ा के जिलाधिकारी को हंसी के परिवार से संपर्क करने को कहा गया है। कोशिश की जा रही है कि हंसी का परिवार उसे अपने साथ लेकर जाए।सरकार हंसी के स्वस्थ होने तक सारा खर्चा वहन करेगी। मदन कौशिक , कैबिनेट मंत्री व सरकारी प्रवक्ता

अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के रणखिला गांव की हंसी प्रहरी 1998-99 कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्रसंघ की वाइस प्रेसिडेंट रहीं। पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय में होने वाली तमाम गतिविधयों जैसे डिबेट, कल्चर प्रोग्राम या दूसरे अन्य कार्यक्रम में वह प्रथम आया करती थीं। हंसी ने चार साल विश्वविद्यालय में लाइब्ररियन की नौकरी भी की। इसके बाद 2008 तक कई प्राइवेट जॉब की। 2011 के बाद हंसी की जिंदगी अचानक से बदल गई।

हंसी प्रहरी की स्थिति और शैक्षिक योग्यता के बारे में जानकर मैं अत्यंत दुखी हूं, मैंने कुछ कार्यकर्ताओं को हंसी की मदद करने के लिये भेजा है, इसके साथ ही मैंने हरिद्वार के ही एक संत से बात की है जो अपने संस्थान में हंसी को ट्यूशन पढ़ाने के लिए आमंत्रित करेंगे।        हरीश रावत, पूर्व मख्यमंत्री

शादीशुदा जिंदगी में उथल-पुथल के बाद हंसी कुछ समय तक अवसाद में रहीं। इसी बीच उनका धर्म की ओर झुकाव हो गया और परिवार से अलग होकर हरिद्वार पहुंच गईं। इस दौरान वह बीमार रहने लगी। वह चाहकर भी कहीं नौकरी नहीं ंकर पाई। हंसी 2012 के बाद से ही हरिद्वार में भिक्षा मांग कर अपना और अपने छह साल के बच्चे का गुजर-बसर कर रही है। जबकि, बेटी नानी के साथ रहती है। फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली हंसी जब भी समय होता है तो अपने बेटे को फुटपाथ पर ही बैठकर पढ़ाती है। हंसी ने कई बार मुख्यमंत्री को सहायता के लिए पत्र लिखा। यही नहीं, कई बार सचिवालय और विधानसभा के चक्कर भी काटें, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं होने के कारण इस प्रतिभाशाली महिला का भिक्षा मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हंसी के साथ अब तक जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने हंस फाउंडेशन से हंसी की सहायता के लिए बात की है। जल्द ही उन्हें सहायता पहुंचाई जाएगी।  प्रदीप टम्टा, राज्यसभा सदस्य

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